लेकिन फर्क तो है…..

बहुत आसान है पहचान इसकी
अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है
मशहूर हो गया हूँ तो ज़ाहिर है दोस्तो
इलज़ाम सौ तरह के मेरे सर भी आयेंगे,थोड़ा सा अपनी चाल बदल कर चलो , सीधे चले तो पींठ में खंज़र भी आयेंगे…..
अगर है दम तो चल डुबा दे मुजको, समंदर नाकाम रहा, अब तेरी आँखो की बारी.
नजर में बदलाव है उनकी, हमने देखा है आजकल !
एक अदना सा आदमी भी , आँख दिखा जाता है !!
ना इतना चाह मुझे की तेरा तलब्दार बन जाऊ,
तेरी मोहब्बत दीवानगी का में हकदार बन जाऊ,
मेरे मुक़द्दर तक़दीर की तू परवाह ना किया कर,
ऐसा ना हो की में खुद तुझ में तेरी तस्वीर बन जाऊ…
क्या फर्क है दोस्ती और मोहोब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही है…?
लेकिन फर्क तो है…..
बरसो बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहोब्बत नज़र चुरा लेती है…!!
दिन तो कट जाता है शहर की रौनक में ,
कुछ लोग याद बहुत आते है दिन ढल जाने के बाद…
ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और लोग मुझे आवारा समझते हैं..!!
“सुनकर ज़माने की बातें , तू अपनी अदा मत बदल,,
यकीं रख अपने खुदा पर,,यूँ बार बार खुदा मत बदल……!!
तुमने कहा था हर शाम तेरे साथ गुजारेगे,
तुम बदल चुके हो या फिर तेरे शहर में
शाम ही नहीं होती?
तेरी मोहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना,
हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते…
ये कफ़न, ये कब्र, ये जनाज़े,
सब रस्म ऐ दुनिया है दोस्त,
मर तो इन्सान तब ही जाता है,
जब याद करने वाला कोई ना हो.
“हम अपने पर गुरुर नहीं करते,
याद करने के लिए किसी को मजबूर नहीं करते.
मगर जब एक बार किसी को दोस्त बना ले,
तो उससे अपने दिल से दूर नहीं करते.”
क्या फर्क है दोस्ती और मोहोब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही है…?
लेकिन फर्क तो है…..
बरसो बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहोब्बत नज़र चुरा लेती है…!!
अरमान था तेरे साथ जिंदगी बिताने का,
शिकवा है खुद के खामोश रह जाने का,
दीवानगी इस से बढकर और क्या होगी,
आज भी इंतजार है तेरे आने का.
सफ़र मोह्हबत का करके तो देखो इंतजार हमसफ़र का करके तो देखो समझ जायेंगे प्यार को तुम्हारे एक बार दिल से इज़हार तो करके देखो
“रफ़्तार कुछ ज़िन्दगी की यूँ बनाये रख ग़ालिब,
कि
दुश्मन भले आगे निकल जाए
पर
दोस्त कोई पीछे न छूटे…….
फ़लक पर कबूतर दिखे जब कभी,
बहुत याद आयीं तेरी चिठ्ठियाँ..
फिर से मुझे मिट्टी में खेलने दे खुदा ,……………
ये साफ़ सुथरी ज़िन्दगी,
ज़िन्दगी नहीं लगती।
“लोग कहते हैं पिये बैठा हूँ मैं,
खुद को मदहोश किये बैठा हूँ मैं,
जान बाकी है वो भी ले लीजिये,
दिल तो पहले ही दिये बैठा हूँ मैं”
पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है.
अभी तो आए है जमीं पर . आसमान की उडान अभी बाकी है.
अभी तो सुना है लोगो ने सिर्फ मेरा नाम.
अभी इस नाम कि पहचान बनाना बाकी है….
वो इस कमाल से खेले थे इश्क की बाजी …..!!
मैं अपनी फतह समझता रहा मात होने तक…!!!
“जब इश्क और क्रांति का अंजाम एक ही है तो राँझा बनने से अच्छा है भगतसिंह बन जाओ”
अजीब था उनका अलविदा कहना !सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं! ँ बर्बाद हुवे उनकी मोहब्बत में, की लुटा कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीँ !
मुस्कुराना तो मेरी शख्सियत
का एक हिस्सा है दोस्तों…..
तुम मुझे खुश समझ कर
दुआओ में भूल मत जाना….
“डर मुझे भी लगा फांसला देख कर;
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर;
खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई;
मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर।”
लेकिन फर्क तो है…..
लेकिन फर्क तो है…..

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